बिना कोर्ट आदेश वाहन ट्रांसफर पर रोक अवैध

वाहन ट्रांसफर से जुड़ी आम समस्या

भारत में अक्सर देखा जाता है कि वाहन मालिक या उनके परिवारजन वाहन ट्रांसफर के लिए आरटीओ कार्यालय जाते हैं, लेकिन वहां यह कहकर प्रक्रिया रोक दी जाती है कि वाहन “Not to be Transacted” है। कई मामलों में यह रोक केवल शिकायत, पुलिस संदर्भ या किसी निजी विवाद के आधार पर लगा दी जाती है, जबकि इसके पीछे कोई वैध कोर्ट आदेश नहीं होता।

हाईकोर्ट का स्पष्ट कानूनी दृष्टिकोण

हाल ही में हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना सक्षम न्यायालय के आदेश के किसी भी वाहन के ट्रांसफर पर रोक लगाना कानून के विरुद्ध है। प्रशासनिक अधिकारी या परिवहन विभाग अपनी मर्जी से वाहन को ट्रांसफर से नहीं रोक सकते।

“Not to Be Transacted” कब लगाया जा सकता है

कोर्ट ने साफ कहा कि वाहन को “Not to Be Transacted” घोषित करने के लिए कुछ कानूनी शर्तें पूरी होना जरूरी है। जब तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन न किया जाए या किसी न्यायालय से स्पष्ट रोक का आदेश न हो, तब तक ऐसा करना अवैध है।

कानूनी उत्तराधिकारियों के अधिकार

अक्सर वाहन मालिक की मृत्यु के बाद उसके परिवार को ट्रांसफर में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी वाहन लंबे समय तक किसी मृत व्यक्ति के नाम पर नहीं रखा जा सकता और कानूनी उत्तराधिकारियों को नियमानुसार ट्रांसफर के लिए आवेदन करने का पूरा अधिकार है।

क्या कोर्ट ने स्वामित्व तय किया?

यह समझना बहुत जरूरी है कि इस प्रकार के मामलों में कोर्ट आमतौर पर स्वामित्व का अंतिम निर्णय नहीं करती। कोर्ट केवल यह देखती है कि प्रशासनिक कार्रवाई कानून के अनुसार है या नहीं। यदि ट्रांसफर पर लगी रोक अवैध पाई जाती है, तो उसे हटाने का निर्देश दिया जाता है।

आरटीओ और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी

इस निर्णय से यह संदेश साफ जाता है कि आरटीओ और परिवहन विभाग को हर मामले में कानून का पालन करना अनिवार्य है। केवल शिकायत, नोटिस या लंबित विवाद के आधार पर वाहन ट्रांसफर रोकना अब सही नहीं माना जाएगा।

आम नागरिकों के लिए इस फैसले का महत्व

यह फैसला उन सभी लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो: • वाहन खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों में फंसे हैं • पारिवारिक या उत्तराधिकार विवाद के कारण ट्रांसफर नहीं करा पा रहे • आरटीओ की मनमानी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं इस निर्णय से नागरिकों को अपने अधिकार समझने और उनका सही तरीके से उपयोग करने में मदद मिलती है।

कोर्ट मैरिज और अन्य कानूनी मामलों से संबंध

वाहन ट्रांसफर, संपत्ति अधिकार और कोर्ट मैरिज जैसे विषय अक्सर आपस में जुड़े होते हैं। कानूनी जागरूकता न होने के कारण लोग गलत सलाह में फंस जाते हैं और उनका नुकसान होता है।

निष्कर्ष

हाईकोर्ट का यह निर्णय एक स्पष्ट संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। बिना कोर्ट आदेश वाहन ट्रांसफर रोकना अवैध है और ऐसे मामलों में नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए कानूनी सहायता जरूर लेनी चाहिए।

कानूनी सहायता और संपर्क

यदि आप वाहन ट्रांसफर, कोर्ट मैरिज, संपत्ति विवाद या किसी अन्य कानूनी समस्या से जूझ रहे हैं, तो सही समय पर सही सलाह लेना बेहद जरूरी है। https://delhilawfirm.news
Helpline: 9990649999, 9999889091